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Category: Uncategorized

November 24, 2025December 10, 2025

प्राचीन भारत-हर्ष का मधुबन ताम्रपत्र

(सन्दर्भ- श्रीवास्तव कृष्ण चन्द्र, 2007, यूनाइटेड बुक डिपो, इलाहाबाद, प्राचीन भारत का इतिहास तथा संस्कृति, पृष्ठ- 500 से 501)   सिद्धम।। स्वस्ति(।।) महानौहस्त्यश्वजयस्कन्धावारात्कपित्थिकायाः महाराजश्रीनरवर्द्धनस्तस्यपुत्रस्तत्पादानुध्यातः श्रीवज्रिणीदेव्यामुत्पन्नः परमादित्यभक्तोमहाराजश्रीराज्यवर्द्धनस्तस्यपुत्रस्तत्पादानुध्यातःश्रीअप्सरोदेप्यामुत्पन्नःपरमादित्यभक्तो महाराजश्रीमदादित्यवर्द्धनस्तस्यपुत्रस्तत्पादानुध्यातः श्रीमहासेनगुप्तादेव्यामुत्पन्नश्चतुस्समुद्रातिक्क्रान्तकीर्तिः प्रतापानुरागोपनयान्यराजोवर्णाश्रमव्यवस्थापनप्रवृत्तचक्र एकचक्ररथ इव प्रजानामार्तिहरः परमादित्यभक्त            परमभट्टारक  महाराजाधिराजश्रीप्रभाकरवर्द्धनस्तस्यपुत्त्रस्तत्पादानुध्यातः तियशःप्रतानविच्छुरितसकलभुवनमण्डलः परिगृहीतधनदवरुणेन्द्र प्रभृतिलोकपालतेजाः सत्पथोपार्ज्जितानेकद्रविणभूमिप्रदानसंप्रीणितार्थिहृदयो(ऽ)तिशयतिपूर्व्वराजचरितो देव्याममलयशोमत्यां श्रीयशोमत्यामुत्पन्नः परमसौगतः सुगत इव परहितैकरतः परमभट्टारकमहाराजाधिराजश्रीराज्यवर्द्धनः। राजानो युधि दुष्टवाजिन इव…

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November 24, 2025December 10, 2025

प्राचीन उत्तराखण्ड का कार्तिकेयपुर राजवंश

  उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास के मुख्य स्रोत धार्मिक ग्रंथ और विभिन्न स्थलों से प्राप्त अभिलेख हैं। इस पर्वतीय राज्य का सबसे प्राचीन राजवंश ‘कुणिन्द’ को माना जाता है, जिसका प्राचीनतम् उल्लेख महाभारत से प्राप्त होता है। द्वितीय शताब्दी ईस्वी पूर्व से तृतीय शताब्दी ई. मध्य तक कुणिन्द जनपद पंजाब से उत्तराखण्ड तक विस्तृत था।…

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November 24, 2025December 10, 2025

पाण्डुकेश्वर ताम्रपत्र ललितशूरदेव और पद्मटदेव

चमोली जनपद के अलकनंदा घाटी में बद्रीनाथ के निकट पाण्डुकेश्वर मंदिर ऐतिहासिक दृष्टि से उत्तराखण्ड में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थल है। यह मंदिर महाभारत कालीन राजा ‘पाण्डु’ और कार्तिकेयपुर के इतिहास को संरक्षित करने में सफल रहा। इस मंदिर से कार्तिकेयपुर नरेशों के चार ताम्रपत्र हुए हैं, जो उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास के गौरवशाली कालखण्ड को…

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November 24, 2025December 10, 2025

उत्तराखण्ड के अभिलेख और कुशली

उत्तराखण्ड के अभिलेख और कुशली शब्द का बहुत ही घनिष्ठ संबंध है। यह एक ऐसा शब्द है, जो समाज  में आपसी संबंधों को सशक्त बनाता है। इसके अतिरिक्त यह शब्द उत्तराखण्ड के प्राचीन अभिलेखों  में उत्कीर्ण लेख हेतु भी उपयोगी था। पाण्डुलिपि या अभिलेखीय साक्ष्य प्राचीन इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। साहित्यिक और धार्मिक पुस्तकों तथा अभिलेखों…

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November 24, 2025December 10, 2025

द्युतिवर्म्मन, हर्ष और ललितशूरदेव के पदाधिकारी

हर्ष साम्राज्य के पतनोपरांत भारत में क्षेत्रीय राज्य पुनः शक्तिशाली हो गये। कश्मीर से कन्याकुमारी तक नवीन राजवंशों का उदय हुआ। प्राचीन काल से कुमाऊँ के मैदानी क्षेत्र में गोविषाण राज्य अस्तित्व में था, जहाँ की यात्रा सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वैनसांग ने की थी। इस प्राचीन राज्य के पुरातात्विक अवशेष काशीपुर के उज्जैन…

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November 24, 2025December 10, 2025

भारतीय इतिहास वीर माताओं की प्रेरक कृत्य

भारतीय इतिहास अनेक वीर माताओं की प्रेरक सुकृत्यों को हमारे समक्ष प्रस्तुत करता है। प्राचीन काल से भारतीय समाज वैभवशाली शाक्त-संस्कृति के तहत वीर माताओं की स्तुति करता आया है और समय-समय पर मातृ-शक्ति समाज में अपना बहुमूल्य स्थान बनाये रखने में सफल हुई है। लगभग 4700 वर्ष प्राचीन हड़प्पा कालीन पुरातात्विक सामग्री से हमें…

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November 24, 2025December 10, 2025

बंगाल का पालवंश और कार्तिकेयपुर के नरेश

(प्रमुख पाल शासक) क्र.सं.  पाल शासक   शासन काल             अभिलेख 1- गोपाल           750 – 770 ई.              ———— 2- धर्मपाल           770 – 810 ई.              खालीमपुर लेख। 3 – देवपाल        …

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November 24, 2025December 10, 2025

राजषड्यंत्र और बाजबहादुरचंद का बाल्यकाल

राजषड्यंत्र काल में तेवाड़ी ब्राह्मणी के घर में बाजबहादुरचंद का बाल्यकाल व्यतीत हुआ था। बालक ’बाजा’ को सन् 1628 ई. में लगभग छः-सात वर्ष हो चुके थे। राजषड्यंत्र दिलिपचंद के शासन काल में सन् 1621-22 से शुरू हो चुका था। राजषड्यंत्रकारियों का नेता पीरु गुसाईं सभी चंद वंशजों की हत्या करने के उपरांत स्वयं चंद…

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November 24, 2025December 10, 2025

ललितशूरदेव का इक्कीसवें राज्य वर्ष का ताम्रपत्र

  चमोली के पाण्डुकेश्वर से ललितशूरदेव के दो ताम्रपत्र- 21 वें और 22 वें राज्य वर्ष के प्राप्त हुए हैं। इस राजा के ताम्रपत्र में उल्लेखित कार्तिकेयपुर की पहचान विद्वान बागेश्वर जनपद के गोमती घाटी में स्थित ‘बैजनाथ’ से करते है, जहाँ प्राचीन मंदिरों का एक समूह गोमती के बायें तट पर स्थित है। इस…

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November 24, 2025December 10, 2025

ललितशूरदेव का इक्कीसवें राज्य वर्ष का ताम्रपत्र

उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी से चम्पावत तक विस्तृत भू-भाग पर स्थित प्राचीन मंदिरों से अनेक अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जिनमें शिलालेख, स्तम्भलेख, त्रिशूललेख और ताम्रपत्र महत्वपूर्ण हैं। सैकड़ों की संख्या में प्राप्त ताम्र धातु के आयताकार और वृत्ताकार फलक पर उत्कीर्ण लेख ही उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। विभिन्न राजवंशों द्वारा समय-समय पर…

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