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Category: Uncategorized

November 26, 2025December 9, 2025

द्युतिवर्मन ताम्रपत्र – प्रथम बारह पंक्तियां

  द्युतिवर्मन का ताम्रपत्र ब्रह्मपुर और पौरव वंश के इतिहास पर प्रकाश डालने वाला महत्वपूर्ण स्रोत है। द्युतिवर्मन पौरव वंश का शासक था। उसके वंश का शासन ब्रह्मपुर राज्य में लगभग छठी शताब्दी के आस पास था। इस वंश का इतिहास केवल ताम्रपत्रों में ही समाहित था। द्युतिवर्मन का ताम्रपत्र अल्मोड़ा जनपद के गढ़वाल सीमावर्ती…

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November 26, 2025December 9, 2025

द्युतिवर्मन का ताम्रपत्र- ब्रह्मपुर राज्य

द्युतिवर्मन का ताम्रपत्र ब्रह्मपुर के पौरव वंश के इतिहास पर प्रकाश डालने वाला सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। द्युतिवर्मन पौरव वंश का चतुर्थ शासक था। इस वंश के पांच शासकों के नाम अभिलेखों से प्राप्त हो चुके हैं। द्युतिवर्मन का ताम्रपत्र राज्य संवत् 5 को निर्गत किया गया था। इस कारण इस ताम्रपत्र की तिथि निर्धारण…

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November 26, 2025December 9, 2025

कुमाऊँ राज्य में चंद वंश का संस्थापक सोमचंद

उत्तराखण्ड का मध्यकालीन इतिहास पंवार और चंद वंश का पारस्परिक युद्धों का कालखण्ड रहा था। मध्यकालीन उत्तराखण्ड में पंवार तथा चंद वंश को क्रमशः गढ़वाल और कुमाऊँ राज्य स्थापित करने का श्रेय जाता है। चंद राजा रुद्रचंददेव सोहलहवीं शताब्दी में कुमाऊँ राज्य को स्थापित करने में सफल हुए थे। लेकिन रुद्रचंददेव से सैकड़ों वर्ष पहले…

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November 26, 2025December 9, 2025

उत्तर-कत्यूरी काल में कुमाऊँ के स्थानीय राज्य

तेरहवीं शताब्दी में महान कत्यूरी राज्य के पतनोपरांत स्थानीय राज्यों का उदय हुआ, जिसे उत्तर कत्यूरी काल कहा जाता है। कत्यूरियों के कुमाऊँ राज्य का विभाजन कत्यूरी राजपरिवार की विभिन्न शाखाओं में हुआ, जिनमें मुख्यतः अस्कोट के पाल और डोटी के मल्ल थे। उत्तर कत्यूरी कालखण्ड के आरंभिक वर्षों में कुमाऊँ के स्थानीय क्षत्रपों ने…

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November 26, 2025December 9, 2025

अस्कोट के रजवार शासकों के ताम्रपत्र 

अस्कोट के रजवार शासकों के ताम्रपत्र कुमाऊँ के पृथक-पृथक स्थानों से प्राप्त हुए है, जो कुमाऊँ के सरयू पूर्व भू-भाग पर रजवारों द्वारा शासित क्षेत्र के राजनैतिक भूगोल को निर्धारित करने में सहायक हैं। तेरहवीं शताब्दी के अंतिम पड़ाव में कुमाऊँ का सरयू पूर्व क्षेत्र सीरा, सोर और गंगोली राज्य में विभाजित हो चुका था।…

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किरौली ताम्रपत्र- गंगोली के रजवार

किरौली ताम्रपत्र का संबंध गंगोली राज्य के रजवार शासकों से था। उत्तराखण्ड का प्राचीन कत्यूरी राज्य तेरहवीं शताब्दी में क्षेत्रीय राज्यों में विभाजित हो गया था। इनमें से एक राज्य सरयू-पूर्वी रामगंगा अंतस्थ क्षेत्र में स्थित था, जिसे ‘गंगावली’ या ‘गंगोली’ कहा गया। प्राचीन गंगोली राज्य नाग मंदिरों के लिए प्रसिद्ध था। इस क्षेत्र विशेष…

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November 26, 2025December 9, 2025

आनन्दचंद रजवार का किरौली ताम्रपत्र 

बड़ाऊँ या वर्तमान बेरीनाग तहसील के किरौली गांव से अस्कोट राजपरिवार के रजवार शासक आनन्दचंद रजवार का ताम्रपत्र प्राप्त हुआ, जिसे किरौली ताम्रपत्र कहा जाता है। रजवार शासक का किरौली ताम्रपत्र सर्वप्रथम सन् 1999 ई. में प्रकाश में आया था। यह ताम्रपत्र राजाधिराज आनन्द रजवार ने पूजा-पाठ हेतु केशव पंत को सन् 1597 ई. में…

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November 26, 2025December 9, 2025

गंगोली में सामन्ती शासन व्यवस्था

गंगोली में सामन्ती शासन व्यवस्था सोलहवीं शताब्दी में चंद कालीन कुमाऊँ राज्य की प्रमुख विशेषता थी। इस सामन्ती शासन काल को रजवार शासन काल भी कह सकते हैं। गंगोली में सामन्ती शासन, चंद राजा रुद्रचंद द्वारा सीराकोट को विजित करने के उपरांत शुरू हुआ था। सीराकोट पूर्वी रामगंगा और काली अंतस्थ क्षेत्र का सबसे दुर्भेद्य…

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कुमाऊँ- गंगोली के रजवार शासक 

   तेरहवीं शताब्दी में कत्यूरी राज्य के पतनोपरांत मध्य हिमालय (कुमाऊँ क्षेत्र) स्वतंत्र लघु राज्य इकाइयों में विभाजित हो गया था। उन्हीं में एक गंगोली भी था। कुमाऊँ की दो प्रमुख नदियों सरयू और पूर्वी रामगंगा से घिरे भू-भाग को गंगोली कहा जाता था, जहाँ सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में ‘रजवार’ नामान्त उपाधि धारक शासकों ने राज्य…

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कुमाऊँ का मध्य कालीन इतिहास – चंद ताम्रपत्र

चंद ताम्रपत्र, जहाँ कुमाऊँ के मध्य कालीन इतिहास हेतु विस्तृत सामग्री प्रस्तुत करते हैं, वहीं उत्तराखण्ड के प्राचीन और मध्य कालीन इतिहास के प्रमुख स्रोत भी ताम्रपत्र हैं। कुमाऊँ के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों चंद ताम्रपत्र प्राप्त हो चुके हैं, वहीं उत्तराखण्ड के प्राचीन पौरव और कार्तिकेयपुर राज्य के क्रमशः दो व पांच ताम्रपत्र प्राप्त…

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