राजा कल्याणचंददेव के ताम्रपत्र कुमाऊँ में विस्तृत चंद राज्य के प्रमाण को प्रस्तुत करते हैं। इस राजा के शासन काल में चंद राज्य की राजधानी चंपावत से अल्मोड़ा स्थानान्तरित हुई। अन्य चंद राजाओं की भाँति राजा कल्याणचंददेव के ताम्रपत्र भी स्थानीय कुमाउनी भाषा में उत्कीर्ण हैं।
राजा कल्याणचंददेव के ताम्रपत्र भी उसके शासन काल को सन् 1545 से 1568 ई. मध्य निर्धारित करते हैं। जबकि कुमाऊँ इतिहास पर कार्य करने वाले विद्वानों और इतिहासकारों ने इस चंद राजा के शासन काल को सन् 1555 से 1568 के मध्य निर्धारित किया था। पिथौरागढ़ के भेटा से प्राप्त ताम्रपत्र में क्रमशः शाके 1467 और 1602 विक्रम संवत् तथा महाराजाधिराज कल्याणचंद का उल्लेख किया गया है। इस ताम्रपत्र में उसके पिता भीष्मचंद का नाम भी उत्कीर्ण है।
👉गौंछ ताम्रपत्र-
आदेस स्विस्ति साके 1478 समये म (सा) सानि मार्गसि (र) 4 गते सो
म वासरे अमाव (वा) स्या (यां) तिथे (थौ) विस (सा) का नक्षतेरे (त्रे) र (रा) जा धीरा
ज कल्य (ल्या) न च (चं) द ले मयाचितो इ गो (गौं) छ संकल्प करी
दिनु सुर्ज ग्र (ह) न मडल वसि दिनु रतनाकर पाड (डे) ले
पायो सर्वकर अकर सर्वदोष विसुद पानी सो ध धु (द्वंद्व)
र आ । नीकास करी पायो गै (गौं) छ लागो गाड को बगड ले क।
0 इजर पायो का डो वा (पा) वो प्र ध (धा) न बैकुठ बिष्ट स (सा) कि राइसि
0 बिष्ट चारबुडा छइ गौरा। मन म (ह) र सर खडाइत 0 क 0
0 0 ठि धामी ले खत वसु जोइसि स्वदत्त वा परदत्ते व शुभं
प्राप्ति स्थान- श्री षष्टी बल्लभ पांडे, गौंछ (खर्कदेश), पिथौरागढ़।
हिन्दी भाषान्तर-
आदेश, स्वस्ति साके 1478 समय, मार्गशीर्ष (अगहन) मास के 4 गते सो-
मवार की अमावस्या की तिथि के अवसर पर बिशाका नक्षत्र में, राजाधिरा-
ज कल्याणचंद ने प्रसन्न होकर गौंछ गांव संकल्प करके
दे दिया। सूर्य ग्रहण (मण्डल में ग्रहण लगा था) के अवसर पर दिया, रतनाकर पांडे ने
पाया। समस्त करों से मुक्त, सभी दोषों से विशुद्ध किया, पाना चाहिए। वह ?
। मुक्त करके पा लिया। गौंछ (गांव) से लगी लघुनदी की तटवर्ती भूमि (बगड)़,
0 इजर व कांडो (चट्टानी भाग) पायेगा (उसी का हो गया), प्रधान बैकुंठ बिष्ट, साक्षी राइसिं
बिष्ट, चार बूढ़ा, छइ गौरा, मन महर, सर खड़ायत 0 क 0
0 ठि धामी। बसु जोइसि ने लिखा। व्यास कृत भूमिदान की महत्ता, कल्याण हो।
ताम्रपत्र का संक्षिप्त सार-
1- निर्गत करने की तिथि- सोमवार, अमावस्या और सूर्यग्रहण, 12 नवम्बर, 1556 ई. (शाके 1478 समय, मार्गशीर्ष (अगहन) मास के 4 गते सोमवार की अमावस्या )
2- ताम्रपत्र निर्गत करने वाला शासक- राजाधिराज कल्याणचंद।
3- भूमिदान प्राप्त करने वाला व्यक्ति एवं स्थान- रत्नाकर पाण्डे एवं गौंछ (पिथौरागढ़)। यह दानपत्र भी सोर पर चंद शासन की पुष्टि करता है।
4- दान भूमि करों से मुक्त- समस्त करों से मुक्त।
5- साक्षी- राइसि 0 बिष्ट (राइसि बिष्ट), चारबुडा (चार बूढ़ा), छइ गौरा (छः गौर्या)। मन म (ह) र (मन महर), सर खडाइत (सर खड़ायत), 0 क 0 0 0 ठि धामी (अस्पष्ट) आदि इस ताम्रपत्र के साक्षी थे।
टिप्पणी- चार बूढ़- चार प्रतिष्ठित वरिष्ठ मुखिया- कार्की, बोरा, चौधरी, तड़ागी (चम्पावत)।
छइ गौरा- सोर के छः क्षत्रिय कुल- महर, सौन, वल्दिया, सेठी, खड़ायत, रावल।
6- लेखक एवं टंकणकर्ता- इस ताम्रपत्र के लेखक वसु जोइसि (वसु जोशी) थे। जबकि इस ताम्रपत्र में टंकणकर्ता का नाम उत्कीर्ण नहीं किया गया है।
