नंदा का उल्लेख- नंदा-सुनंदा उत्तराखंड की आराध्य देवियाँ के साथ-साथ एक सांस्कृतिक पहचान भी है। सांस्कृतिक पहचान के साथ नंदा देवी अपना एक भौगोलिक पहचान को धारण किये हुए है। नंदादेवी उत्तराखण्ड हिमालय की सबसे ऊँची चोटी है, जिसकी ऊँचाई 7817 मीटर है। यह पर्वत उत्तराखण्ड के चमोली जनपद में 30° 22’ 33’’ उत्तरी अक्षांश…
Month: November 2025
सरयू और पूर्वी रामगंगा- गंगोली की नदियां
कुमाऊँ का ‘गंगोली’ क्षेत्र एक विशिष्ट सांस्कृतिक और भौगोलिक क्षेत्र है। इस विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र को सरयू-पूर्वी रामगंगा का अंतस्थ क्षेत्र भी कह सकते हैं। वर्तमान में गंगोली का मध्य-पूर्व और दक्षिणी क्षेत्र पिथौरागढ़ तथा मध्य-पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्र बागेश्वर जनपद में सम्मिलित है। गंगोली क्षेत्र पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में दो नदियां…
एक हथिया देवाल स्थापत्य कला और दंत कथा-
स्थापत्य- एक हथिया मंदिर की कुल ऊँचाई 10 फीट 2 इंच है। मंदिर की कुल लम्बाई मण्डप सहित 8 फीट 2 इंच तथा चौड़ाई 4 फीट 1 इंच है। इस प्रकार मंदिर की लम्बाई और चौड़ाई में 2 और 1 का अनुपात है। इस एकाश्म मंदिर का आधार शिलाखण्ड की लम्बाई 16 फीट…
कुमाऊँ का कैलास मंदिर-एक हथिया देवाल
कुमाऊँ का एक मात्र एकाश्म प्रस्तर से निर्मित प्राचीन मंदिर पिथौरागढ़ जनपद के थल नगर पंचायत के निकटवर्ती बलतिर और अल्मिया गांव के मध्य में स्थित है। इस एकाश्म मंदिर को ‘एक हथिया’ कहा जाता है। शैली व कालक्रम के आधार पर इतिहासकार इस मंदिर को दशवीं सदी के आस पास का बतलाते है। इस…