ब्रिटिश कालीन गंगोली राजनीतिक भूगोल की ऐतिहासिक शुरूवात सन् 1815 में गोरखा सेना के पराजय के साथ हुई। ‘‘ता. 27 अपै्रल, 1815 को अल्मोड़ा की राजधानी में अंगरेजों का अधिकार होने से सारा कुमाऊँ उनके आधिपत्य में आ गया।’’ कुमाऊँ के प्रथम कमिश्नर गार्डनर ने लगभग छ महीने शासन में अंग्रेजी राज्य की नींव रखी। ‘‘3 मई, 1815 को अंग्रेजी राज्य की स्थापना की घोषणा करके नेपाली प्रभुत्व की समाप्ति से स्थानीय लोगों को अवगत कराया था।’’
पहला बंदोबस्त
कुमाऊँ का पहला बंदोबस्त, प्रथम कमिश्नर एडवर्ड गार्डनर के ने किया। ‘‘1815 में प्रथम कमिश्नर एडवर्ड गार्डनर के समय में यहाँ नौ तहसीलें- अल्मोड़ा, काली-कुमाऊँ, पाली-पछाऊँ, कोटा, सोर, फल्दाकोट, रामगढ़, श्रीनगर और चाँदपुर थीं।’’ गढ़वाल शासक सुदर्शन शाह और ईस्ट इण्डिया कंपनी के मध्य हुई संधि के अनुसार श्रीनगर और चाँदपुर की तहसीलां को अंग्रेजी राज्य ‘कुमाऊँ कमिश्नरी’ में सम्मिलित किये गये। प्रथम बंदोबस्त में परगना गंगोली को ‘सोर’ (वर्तमान पिथौरागढ़) तहसील में सम्मिलित किया गया था। ‘‘1821 में सोर तहसील को समाप्त करके गंगोली को हजूर तहसील (अल्मोड़ा) में तथा सोर, सीरा और अस्कोट परगनों को काली कुमाऊँ से संयुक्त किया गया।’’
ब्रिटिश कालीन गंगोली के ‘कमस्यार’ पट्टी के आधार पर परगना गंगोली के राजनीतिक भूगोल को परिभाषित करते हुए ए.टी. एटकिंसन लिखते हैं-ः ‘‘कमस्यार- कुमाऊँ में गंगोली परगने की एक पट्टी इसके पश्चिम में सरयू नदी, पूर्व में बड़ाऊँ पट्टी, उत्तर में दुग और पुंगराऊँ तथा दक्षिण में बघेर या भद्रपतिगाड़ है जो कमस्यार को अठगाँव से अलग करती है।’’ कमस्यार पट्टी का सीमांकन ब्रिटिश कालीन परगना गंगोली के सीमाकंन हेतु पर्याप्त तथ्य प्रस्तुत करता है। ‘‘सन् 1821 के बाद प्राकृतिक पट्टियों की प्रणाली शुरू कर दी गई। छोटे परगनों को उन बड़े परगनों की पट्टी बना दिया गया जिसमें में पहले हुआ करते थे। कत्यूर और गंगोली को भी एक परगना तथा भोट क्षेत्र को एक अन्य परगना बनाया गया जिससे कुल मिलाकर परगनों की संख्या चौदह हो गई।’’ चंद राज्य का ‘गर्खा गंगोली’ ब्रिटिश शासन काल में सन् 1821 ई. के पश्चात ‘परगना’ नामक एक प्रशासनिक इकाई के रूप में गठित हुआ। सन् 1821 में गंगोली का राजनीतिक भूगोल इस प्रकार था- दो परगने गंगोली और सरयू पूर्व का दानपुर परगना, तहसील अल्मोड़ा, जनपद कुमाऊँ।
गंगोली की पट्टियां
ब्रिटिश कालीन परगना गंगोली में कुल छः पट्टियां थीं- ‘‘बेल, भेरंग, बढ़ाऊँ, कमस्यार, पुंगरांव और अठगांव। इनमें चार पट्टियां वर्ष 1842 में बनाई गईं या मान्य की गईं।’’ ‘‘1864 से पूर्व की पट्टियां- गंगोली में बेल, बड़ाऊँ, कमस्यार, अठीगांव पुंगराऊँ।’’ सन् 1842 में परगना गंगोली 4 तथा सन् 1864 से पहले 5 पट्टियों में विभाजित था। अठिगांव पट्टी का सृजन सन् 1842 ई. और 1864 ई. के मध्य किया गया था। ‘‘1864 में सृजित पट्टियां- गंगोली में भेरंग और दानपुर में- दानपुर बिचला, दुग, कत्यूर बिचला, नाकुरी।’’ गंगोली की छठवीं पट्टी भेरंग का गठन नौवें बंदोबस्त (सन् 1863-64 ई.) में किया गया। इस प्रकार सन् 1864 ई. में सरयू-पूर्वी रामगंगा अंतस्थ क्षेत्र में परगना गंगोली की बेल, भेरंग, बढ़ाऊँ, कमस्यार, पुंगरांव, अठगांव, भेरंग तथा परगना दानपुर की बिचला दानपुर, दुग, नाकुरी पट्टी सम्मिलित थीं। सन् 1864 में गंगोली का राजनीतिक भूगोल इस से प्रकार था- गंगोली और सरयू पूर्व का दानपुर परगना, तहसील अल्मोड़ा, जनपद कुमाऊँ।
नौवें बन्दोबस्त के उपरांत और भारत की स्वतंत्रता तक गंगोली के राजनीतिक भूगोल में इतना ही परिर्वतन हुआ कि यह क्षेत्र सन् 1891 ई. में नव सृजित जनपद अल्मोड़ा के अधीन आ गया। स्वतंत्रतोपरांत भी इस क्षेत्र के राजनीतिक भूगोल में परिर्वतन होता रहा। सन् 1960 ई. में पिथौरागढ़ और सन् 1997 में बागेश्वर जनपद के सृजन के कारण सरयू-पूर्वी रामगंगा अंतस्थ क्षेत्र या गंगोली का राजनीतिक भूगोल परिवर्तित हो गया। सन् 2000 ई. से गंगोली में सरयू पूर्व कपकोट और बागेश्वर तथा पूर्णरूप से बेरीनाग और गंगोलीहाट विकासखण्ड सम्मिलित थे।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखें तो ब्रिटिश कालीन सरयू-पूर्वी रामगंगा अंतस्थ क्षेत्र की पट्टियां आज तहसील बन चुकीं हैं। कमस्यार से काण्डा, विचला दानपुर से कपकोट, दुग और नाकुरी से दुग-नाकुरी, पूर्वी पुंगराऊँ से थल, बेल-भेरंग से गंगोलीहाट, अठिगांव से गणाई गंगोली तथा बड़ाऊँ से बेरीनाग तहसील बन चुकी है। थल, बेरीनाग, गंगोलीहाट और गणाई गंगोली तहसील जनपद पिथौरागढ़ में तथा काण्डा, कपकोट, और दुग-नाकुरी तहसील जनपद पिथौरागढ़ में सम्मिलित हैं।
